मुंगेली। मानदेय बढ़ोतरी, शासकीयकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने आंदोलन तेज कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिका संयुक्त मंच के आह्वान पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में 26 और 27 फरवरी को दो दिन काम बंद रखते हुए धरना–प्रदर्शन किया गया।
मुंगेली जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं ने कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नाम ज्ञापन सौंपा।
50 वर्षों से सेवा, फिर भी न्यूनतम सुविधाओं से वंचित
ज्ञापन में कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं पिछले 50 वर्षों से महिला एवं बाल विकास योजनाओं को गांव–गांव और घर–घर तक पहुंचा रही हैं। पोषण अभियान, टीकाकरण, कोविड महामारी और निर्वाचन कार्यों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इसके बावजूद वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को केवल ₹4500 और सहायिका को ₹2250 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो जीवन यापन के लिए अपर्याप्त है।
2018 के बाद नहीं बढ़ा मानदेय
संयुक्त मंच ने बताया कि 2018 के बाद से केंद्र सरकार ने मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की, वहीं छत्तीसगढ़ में भी बीते दो वर्षों में न तो मानदेय बढ़ाया गया और न ही कोई नई सुविधा दी गई।
शासकीयकरण, पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेस इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाएं आज भी वंचित हैं।
बजट से भी उम्मीदें टूटीं
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं का कहना है कि केंद्र सरकार के 2026–27 के बजट और राज्य सरकार के बजट में भी उनकी मांगों को शामिल नहीं किया गया। इससे प्रदेश सहित देशभर की करीब 28 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं में नाराजगी है।
प्रमुख मांगें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
शासकीयकरण तक कार्यकर्ता को ₹26,000 और सहायिका को ₹22,100 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए।
सेवानिवृत्ति पर पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
9 मार्च को राजधानी में बड़ा आंदोलन
संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि 50 साल की सेवा के बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। जब तक शासकीयकरण नहीं होता, तब तक न्यूनतम वेतन लागू किया जाए।
उन्होंने बताया कि यदि 8 मार्च तक मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो 9 मार्च 2026 को प्रदेशभर से करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं राजधानी रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी।
